Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.80
(133 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
अहं
पूर्वमहं
पूर्वं
द्रक्ष्यामि
वृषभध्वजम्
।
एवं
संप्रस्थिता
राजन्नृषयः
किल
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अहं | पूर्वम् | अहं | पूर्वम् | इति + एवम् | क्षत्रिय + ऋषभ
एवं | संस्थितिका | सिद्धिर् | इयं | लोकस्य | भारत
एवं | संस्थितिका | सिद्धिर् | इयं | लोकस्य | भारत