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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.80
(133 verses)
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Sanskrit Text
ततो
गच्छेत
धर्मज्ञ
रुद्रकोटिं
समाहितः
।
पुरा
यत्र
महाराज
ऋषिकोटिः
समाहिता
।
प्रहर्षेण
च
संविष्टा
देवदर्शनकाङ्क्षया
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | गच्छेत | धर्म + ज्ञ | पुण्य + स्थान | उमापतेः
पुरा | यत्र | महत् + राज | ऋषि + कोटि | समाहिता
प्रहर्षेण | च | संविष्टा | देव + दर्शन + काङ्क्षा
पुरा | यत्र | महत् + राज | ऋषि + कोटि | समाहिता
प्रहर्षेण | च | संविष्टा | देव + दर्शन + काङ्क्षा