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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.80
(133 verses)
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Sanskrit Text
सरस्वत्यां
महाराज
अनु
संवत्सरं
हि
ते
।
स्नायन्ते
भरतश्रेष्ठ
वृत्तां
वै
कार्त्तिकीं
सदा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अहोरात्रं | महत् + राज | तुल्यं | संवत्सरेण | हि
स्नायन्ते | भरत + श्रेष्ठ | वृत्तां | वै | कार्त्तिकीं | सदा
स्नायन्ते | भरत + श्रेष्ठ | वृत्तां | वै | कार्त्तिकीं | सदा