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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.80
(133 verses)
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Sanskrit Text
नागोद्भेदे
नरः
स्नात्वा
नागलोकमवाप्नुयात्
।
शशयानं
च
राजेन्द्र
तीर्थमासाद्य
दुर्लभम्
।
शशरूपप्रतिच्छन्नाः
पुष्करा
यत्र
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र | स्नात्वा | नरः | क्षिप्रं | शक्र + लोक | अवाप्नुयात्
शशयानं | च | राजन् + इन्द्र | तीर्थम् | आसाद्य | दुर्लभम्
शश + रूप + प्रतिच्छद् | पुष्करा | यत्र | भारत
शशयानं | च | राजन् + इन्द्र | तीर्थम् | आसाद्य | दुर्लभम्
शश + रूप + प्रतिच्छद् | पुष्करा | यत्र | भारत