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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.80
(133 verses)
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Sanskrit Text
शृणु
राजन्नवहितो
यथा
भीष्मेण
भारत
।
पुलस्त्यस्य
सकाशाद्वै
सर्वमेतदुपश्रुतम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शृणु | राजन्न् | अवहितो | यथा | भीष्मेण | भारत
पुलस्त्यस्य | सकाशाद् | वै | सर्वम् | एतद् | उपश्रुतम्
पुलस्त्यस्य | सकाशाद् | वै | सर्वम् | एतद् | उपश्रुतम्