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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.8
(23 verses)
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Sanskrit Text
अथ
पश्याम्यहं
पार्थान्प्राप्तानिह
कथंचन
।
पुनः
शोषं
गमिष्यामि
निरासुर्निरवग्रहः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अथ | पश्याम्य् | अहं | पार्थान् | प्राप्तान् | इह | कथंचन
पुनः | शोषं | गमिष्यामि | निरासुर् | निरवग्रहः
पुनः | शोषं | गमिष्यामि | निरासुर् | निरवग्रहः