Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.8
(23 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
यावदस्य
पुनर्बुद्धिं
विदुरो
नापकर्षति
।
पाण्डवानयने
तावन्मन्त्रयध्वं
हितं
मम
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यावद् | अस्य | पुनर् | बुद्धिं | विदुरो | न + अपकृष्
पाण्डव + आनयन | तावन् | मन्त्रयध्वं | हितं | मम
पाण्डव + आनयन | तावन् | मन्त्रयध्वं | हितं | मम