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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.70
(39 verses)
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Sanskrit Text
नलस्तं
प्रत्युवाचाथ
दूरे
भ्रष्टः
पटस्तव
।
योजनं
समतिक्रान्तो
न
स
शक्यस्त्वया
पुनः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
नलस् | तं | प्रतिवच् + अथ | दूरे | भ्रष्टः | पटस् | तव
योजनं | समतिक्रान्तो | न | स | शक्यस् | त्वया | पुनः
योजनं | समतिक्रान्तो | न | स | शक्यस् | त्वया | पुनः