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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.69
(34 verses)
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Sanskrit Text
त्वमेव
हयतत्त्वज्ञः
कुशलश्चासि
बाहुक
।
यान्मन्यसे
समर्थांस्त्वं
क्षिप्रं
तानेव
योजय
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एक + अहर् | हय + तत्त्व + ज्ञ | मन्यसे | यदि | बाहुक
यान् | मन्यसे | समर्थांस् | त्वं | क्षिप्रं | तान् | एव | योजय
यान् | मन्यसे | समर्थांस् | त्वं | क्षिप्रं | तान् | एव | योजय