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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.66
(26 verses)
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Sanskrit Text
प्रतिपत्कलुषेवेन्दोर्लेखा
नाति
विराजते
।
न
चास्या
नश्यते
रूपं
वपुर्मलसमाचितम्
।
असंस्कृतमपि
व्यक्तं
भाति
काञ्चनसंनिभम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
प्रतिपद् + कलुष + इव + इन्दु | लेखा | न + अति | विराजते
न | च + इदम् | नश्यते | रूपं | वपुर् | मल + समाचि
असंस्कृतम् | अपि | व्यक्तं | भाति | काञ्चन + संनिभ
न | च + इदम् | नश्यते | रूपं | वपुर् | मल + समाचि
असंस्कृतम् | अपि | व्यक्तं | भाति | काञ्चन + संनिभ