Vidya Kendra
Mahābhārata
Home Introduction Reader Glossary All Resources
Vidyakendra
Vidyakendra Home

Navigate to Verse

Currently viewing: Parva 3 - Chapter 3.64 (19 verses)
Powered by Aksharamukha

Search Mahābhārata

Try searching for: dharma, युद्ध, Arjuna, 1.1.5 (verse reference)
Quick Navigation: Start Browse Parvas
❖ ❖ ❖

Chapter 3.64

तस्मिन्नन्तर्हिते नागे प्रययौ नैषधो नलः ऋतुपर्णस्य नगरं प्राविशद्दशमेऽहनि
View Padaccheda
तस्मिन्न् | अन्तर्हिते | नागे | प्रययौ | नैषधो | नलः
ऋतुपर्णस्य | नगरं | प्राविशद् | दशमे | ऽहनि
राजानमुपातिष्ठद्बाहुकोऽहमिति ब्रुवन् अश्वानां वाहने युक्तः पृथिव्यां नास्ति मत्समः
View Padaccheda
गच्छ | राजन्न् | इतः | सूतो | बाहुको | ऽहम् | इति | ब्रुवन्
अश्वानां | वाहने | युक्तः | पृथिव्यां | न + अस् | मद् + सम
अर्थकृच्छ्रेषु चैवाहं प्रष्टव्यो नैपुणेषु अन्नसंस्कारमपि जानाम्यन्यैर्विशेषतः
View Padaccheda
अर्थ + कृच्छ्र | च + एव + मद् | प्रष्टव्यो | नैपुणेषु | च
अन्न + संस्कार | अपि | च | ज्ञा + अन्य | विशेषतः
यानि शिल्पानि लोकेऽस्मिन्यच्चाप्यन्यत्सुदुष्करम् सर्वं यतिष्ये तत्कर्तुमृतुपर्ण भरस्व माम्
View Padaccheda
यानि | शिल्पानि | लोके | ऽस्मिन् | यद् + च + अपि + अन्य | सु + दुष्कर
सर्वं | यतिष्ये | तत् | कर्तुम् | ऋतुपर्ण | भरस्व | माम्
वस बाहुक भद्रं ते सर्वमेतत्करिष्यसि शीघ्रयाने सदा बुद्धिर्धीयते मे विशेषतः
View Padaccheda
वस | बाहुक | भद्रं | ते | सर्वम् | एतत् | करिष्यसि
शीघ्र + यान | सदा | बुद्धिर् | धीयते | मे | विशेषतः
त्वमातिष्ठ योगं तं येन शीघ्रा हया मम भवेयुरश्वाध्यक्षोऽसि वेतनं ते शतं शताः
View Padaccheda
स | त्वम् | आतिष्ठ | योगं | तं | येन | शीघ्रा | हया | मम
भवेयुर् | अश्व + अध्यक्ष | ऽसि | वेतनं | ते | शतं | शताः
त्वामुपस्थास्यतश्चेमौ नित्यं वार्ष्णेयजीवलौ एताभ्यां रंस्यसे सार्धं वस वै मयि बाहुक
View Padaccheda
त्वाम् | उपस्था + च + इदम् | नित्यं | वार्ष्णेय + जीवल
एताभ्यां | रंस्यसे | सार्धं | वस | वै | मयि | बाहुक
एवमुक्तो नलस्तेन न्यवसत्तत्र पूजितः ऋतुपर्णस्य नगरे सहवार्ष्णेयजीवलः
View Padaccheda
एवम् | उक्तो | नलस् | तेन | न्यवसत् | तत्र | पूजितः
ऋतुपर्णस्य | नगरे | सह + वार्ष्णेय + जीवल
तत्र निवसन्राजा वैदर्भीमनुचिन्तयन् सायं सायं सदा चेमं श्लोकमेकं जगाद
View Padaccheda
स | तत्र | निवसन् | राजा | वैदर्भीम् | अनुचिन्तयन्
सायं | सायं | सदा | च + इदम् | श्लोकम् | एकं | जगाद | ह
क्व नु सा क्षुत्पिपासार्ता श्रान्ता शेते तपस्विनी स्मरन्ती तस्य मन्दस्य कं वा साद्योपतिष्ठति
View Padaccheda
क्षुध् + पिपासा + परी + च | श्रम् + च | पतिता | भुवि
स्मरन्ती | तस्य | मन्दस्य | कं | वा | तद् + अद्य + उपस्था
एवं ब्रुवन्तं राजानं निशायां जीवलोऽब्रवीत् कामेनां शोचसे नित्यं श्रोतुमिच्छामि बाहुक
View Padaccheda
एवं | ब्रुवन्तं | राजानं | निशायां | जीवलो | ऽब्रवीत्
काम् | एनां | शोचसे | नित्यं | श्रोतुम् | इच्छामि | बाहुक
तमुवाच नलो राजा मन्दप्रज्ञस्य कस्यचित् आसीद्बहुमता नारी तस्या दृढतरं सः
View Padaccheda
तम् | उवाच | नलो | राजा | मन्द + प्रज्ञा | कस्यचित्
आसीद् | बहु + मन् | नारी | तस्या | दृढतरं | च | सः
वै केनचिदर्थेन तया मन्दो व्ययुज्यत विप्रयुक्तश्च मन्दात्मा भ्रमत्यसुखपीडितः
View Padaccheda
स | वै | केनचिद् | अर्थेन | तया | मन्दो | व्ययुज्यत
विप्रयुक्तश् | च | मन्द + आत्मन् | भ्रमत्य् | असुख + पीडय्
दह्यमानः शोकेन दिवारात्रमतन्द्रितः निशाकाले स्मरंस्तस्याः श्लोकमेकं स्म गायति
View Padaccheda
अत्यक्रामत् | स | दुर्गाणि | दिवारात्रम् | अतन्द्रितः
निशा + काल | स्मरंस् | तस्याः | श्लोकम् | एकं | स्म | गायति
वै भ्रमन्महीं सर्वां क्वचिदासाद्य किंचन वसत्यनर्हस्तद्दुःखं भूय एवानुसंस्मरन्
View Padaccheda
स | वै | भ्रमन् | महीं | सर्वां | क्वचिद् | आसाद्य | किंचन
वस् + अनर्ह | तद् + दुःख | भूय | एव + अनुसंस्मृ
सा तु तं पुरुषं नारी कृच्छ्रेऽप्यनुगता वने त्यक्ता तेनाल्पपुण्येन दुष्करं यदि जीवति
View Padaccheda
सा | तु | तं | पुरुषं | नारी | कृच्छ्रे | अपि + अनुगम् | वने
त्यक्ता | तद् + अल्प + पुण्य | दुष्करं | यदि | जीवति
एका बालानभिज्ञा मार्गाणामतथोचिता क्षुत्पिपासापरीता दुष्करं यदि जीवति
View Padaccheda
एका | बाला + अनभिज्ञ | च | मार्गाणाम् | अतथोचिता
त्यक्ता | तद् + अल्प + पुण्य | दुष्करं | यदि | जीवति
श्वापदाचरिते नित्यं वने महति दारुणे त्यक्ता तेनाल्पपुण्येन मन्दप्रज्ञेन मारिष
View Padaccheda
अथ | काले | बहुतिथे | वने | महति | दारुणे
त्यक्ता | तद् + अल्प + पुण्य | दुष्करं | यदि | जीवति
इत्येवं नैषधो राजा दमयन्तीमनुस्मरन् अज्ञातवासमवसद्राज्ञस्तस्य निवेशने
View Padaccheda
इति | ब्रुवन् | नलो | राजा | दमयन्तीं | पुनः | पुनः
अज्ञात + वास | अवसद् | राज्ञस् | तस्य | निवेशने