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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.61
(125 verses)
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Sanskrit Text
स
कैश्चिन्निकृतिप्रज्ञैरकल्याणैर्नराधमैः
।
आहूय
पृथिवीपालः
सत्यधर्मपरायणः
।
देवने
कुशलैर्जिह्मैर्जितो
राज्यं
वसूनि
च
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | कैश्चिन् | निकृति + प्रज्ञ | अकल्याणैर् | नर + अधम
ताः | प्रजाः | पृथिवी + पाल | धर्म + व्रत + परायण
देवने | कुशलैर् | जिह्मैर् | जितो | राज्यं | वसूनि | च
ताः | प्रजाः | पृथिवी + पाल | धर्म + व्रत + परायण
देवने | कुशलैर् | जिह्मैर् | जितो | राज्यं | वसूनि | च