Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.5
(20 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
स
मा
जिह्मं
विदुर
सर्वं
ब्रवीषि;
मानं
च
तेऽहमधिकं
धारयामि
।
यथेच्छकं
गच्छ
वा
तिष्ठ
वा
त्वं;
सुसान्त्व्यमानाप्यसती
स्त्री
जहाति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | मा | जिह्मं | विदुर | सर्वं | ब्रवीषि | मानं | च | ते | ऽहम् | अधिकं | धारयामि
स | यत्र + इष् | विदुर | तत्र | गच्छ | सु + सान्त्वय् + अपि | हि + असत् | स्त्री | जहाति
स | यत्र + इष् | विदुर | तत्र | गच्छ | सु + सान्त्वय् + अपि | हि + असत् | स्त्री | जहाति