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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.5
(20 verses)
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Sanskrit Text
युधिष्ठिरं
त्वं
परिसान्त्वयस्व;
राज्ये
चैनं
स्थापयस्वाभिपूज्य
।
त्वया
पृष्टः
किमहमन्यद्वदेय;मेतत्कृत्वा
कृतकृत्योऽसि
राजन्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
युधिष्ठिरं | त्वं | परिसान्त्वयस्व | राज्ये | च + एनद् | स्थापय् + अभिपूजय्
त्वया | पृष्टः | किम् | अहम् | अन्यद् | वदेयम् | एतत् | कृत्वा | कृतकृत्यो | ऽसि | राजन्
त्वया | पृष्टः | किम् | अहम् | अन्यद् | वदेयम् | एतत् | कृत्वा | कृतकृत्यो | ऽसि | राजन्