Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.46
(41 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
यस्य
मन्त्री
च
गोप्ता
च
सुहृच्चैव
जनार्दनः
।
हरिस्त्रैलोक्यनाथः
स
किं
नु
तस्य
न
निर्जितम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यस्य | मन्त्री | च | गोप्ता | च | सुहृद् + च + एव | जनार्दनः
हरिस् | त्रैलोक्य + नाथ | स | किं | नु | तस्य | न | निर्जितम्
हरिस् | त्रैलोक्य + नाथ | स | किं | नु | तस्य | न | निर्जितम्