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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.40
(61 verses)
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Sanskrit Text
ददर्शाथ
ततो
जिष्णुः
पुरुषं
काञ्चनप्रभम्
।
किरातवेषप्रच्छन्नं
स्त्रीसहायममित्रहा
।
तमब्रवीत्प्रीतमनाः
कौन्तेयः
प्रहसन्निव
॥
Padaccheda (Word Analysis)
दृश् + अथ | ततो | जिष्णुः | पुरुषं | काञ्चन + प्रभा
किरात + वेष + प्रच्छद् | स्त्री + च + अनु | सहस्रशः
अथ + ब्रू | पुष्कराक्षः | प्रहसन्न् | इव | भारत
किरात + वेष + प्रच्छद् | स्त्री + च + अनु | सहस्रशः
अथ + ब्रू | पुष्कराक्षः | प्रहसन्न् | इव | भारत