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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.38
(45 verses)
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Sanskrit Text
तं
दृष्ट्वा
तत्र
कौन्तेयं
प्रगृहीतशरासनम्
।
अब्रुवन्ब्राह्मणाः
सिद्धा
भूतान्यन्तर्हितानि
च
।
क्षिप्रं
प्राप्नुहि
कौन्तेय
मनसा
यद्यदिच्छसि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तं | दृष्ट्वा | तत्र | कौन्तेयं | प्रग्रह् + शरासन
ऋषयो | वा + अथ | वा | देवा | भूत + अन्तर्धा | च
क्षिप्रं | प्राप्नुहि | कौन्तेय | मनसा | यद् | यद् | इच्छसि
ऋषयो | वा + अथ | वा | देवा | भूत + अन्तर्धा | च
क्षिप्रं | प्राप्नुहि | कौन्तेय | मनसा | यद् | यद् | इच्छसि