Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.35
(21 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
न
त्वद्य
शक्यं
भरतप्रवीर;
कृत्वा
यदुक्तं
कुरुवीरमध्ये
।
कालं
प्रतीक्षस्व
सुखोदयस्य;
पक्तिं
फलानामिव
बीजवापः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | तु + अद्य | शक्यं | भरत + प्रवीर | कृत्वा | यद् | उक्तं | कुरु + वीर + मध्य
कालं | प्रतीक्षस्व | सुख + उदय | पक्तिं | फलानाम् | इव | बीजवापः
कालं | प्रतीक्षस्व | सुख + उदय | पक्तिं | फलानाम् | इव | बीजवापः