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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.33
(58 verses)
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Sanskrit Text
पृथिवीं
लाङ्गलेनैव
भित्त्वा
बीजं
वपत्युत
।
आस्तेऽथ
कर्षकस्तूष्णीं
पर्जन्यस्तत्र
कारणम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पृथिवीं | लाङ्गल + एव | भित्त्वा | बीजं | वप् + उत
आस्ते | ऽथ | कर्षकस् | तूष्णीं | पर्जन्यस् | तत्र | कारणम्
आस्ते | ऽथ | कर्षकस् | तूष्णीं | पर्जन्यस् | तत्र | कारणम्