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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.30
(50 verses)
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Sanskrit Text
क्रुद्धो
हि
कार्यं
सुश्रोणि
न
यथावत्प्रपश्यति
।
न
कार्यं
न
च
मर्यादां
नरः
क्रुद्धोऽनुपश्यति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
क्रुद्धो | हि | कार्यं | सुश्रोणि | न | यथावत् | प्रपश्यति
न | कार्यं | न | च | मर्यादां | नरः | क्रुद्धो | ऽनुपश्यति
न | कार्यं | न | च | मर्यादां | नरः | क्रुद्धो | ऽनुपश्यति