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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.28
(37 verses)
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Sanskrit Text
भीमसेनं
हि
कर्माणि
स्वयं
कुर्वाणमच्युत
।
सुखार्हं
दुःखितं
दृष्ट्वा
कस्मान्मन्युर्न
वर्धते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
भीमसेनं | हि | कर्माणि | स्वयं | कुर्वाणम् | अच्युत
सुख + अर्ह | दुःखितं | दृष्ट्वा | कस्मान् | मन्युर् | न | वर्धते
सुख + अर्ह | दुःखितं | दृष्ट्वा | कस्मान् | मन्युर् | न | वर्धते