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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.270
(29 verses)
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Sanskrit Text
धन्योऽसि
यस्य
ते
निद्रा
कुम्भकर्णेयमीदृशी
।
य
इमं
दारुणं
कालं
न
जानीषे
महाभयम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
धन्यो | ऽसि | यस्य | ते | निद्रा | कुम्भकर्ण + इदम् | ईदृशी
य | इमं | दारुणं | कालं | न | जानीषे | महत् + भय
य | इमं | दारुणं | कालं | न | जानीषे | महत् + भय