Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.26
(18 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
न
तात
हृष्यामि
न
च
स्मयामि;
प्रहर्षजो
मां
भजते
न
दर्पः
।
तवापदं
त्वद्य
समीक्ष्य
रामं;
सत्यव्रतं
दाशरथिं
स्मरामि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | तात | हृष्यामि | न | च | स्मयामि | प्रहर्ष + ज | मां | भजते | न | दर्पः
त्वद् + आपद् | तु + अद्य | समीक्ष्य | रामं | सत्य + व्रत | दाशरथिं | स्मरामि
त्वद् + आपद् | तु + अद्य | समीक्ष्य | रामं | सत्य + व्रत | दाशरथिं | स्मरामि