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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.26
(18 verses)
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Sanskrit Text
महाबलान्पर्वतकूटमात्रा;न्विषाणिनः
पश्य
गजान्नरेन्द्र
।
स्थितान्निदेशे
नरवर्य
धातु;र्नेशे
बलस्येति
चरेदधर्मम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
महत् + बल | पर्वत + कूट + मात्र | विषाणिनः | पश्य | गजान् | नर + इन्द्र
सप्तर्षयः | पार्थ | दिवि | प्रभान्ति | न + ईश् | बल + इति | चरेद् | अधर्मम्
सप्तर्षयः | पार्थ | दिवि | प्रभान्ति | न + ईश् | बल + इति | चरेद् | अधर्मम्