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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.26
(18 verses)
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Sanskrit Text
स
चापि
शक्रस्य
समप्रभावो;
महानुभावः
समरेष्वजेयः
।
विहाय
भोगानचरद्वनेषु;
नेशे
बलस्येति
चरेदधर्मम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | च + अपि | शक्रस्य | सम + प्रभाव | महत् + अनुभाव | समर + अजेय
विहाय | भोगान् | अचरद् | वनेषु | न + ईश् | बल + इति | चरेद् | अधर्मम्
विहाय | भोगान् | अचरद् | वनेषु | न + ईश् | बल + इति | चरेद् | अधर्मम्