Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.253
(26 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
पुरा
तुषाग्नाविव
हूयते
हविः;
पुरा
श्मशाने
स्रगिवापविध्यते
।
पुरा
च
सोमोऽध्वरगोऽवलिह्यते;
शुना
यथा
विप्रजने
प्रमोहिते
।
महत्यरण्ये
मृगयां
चरित्वा;
पुरा
शृगालो
नलिनीं
विगाहते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पुरा | तुषाग्नि + इव | हूयते | हविः | पुरा | श्मशाने | स्रग् | इव + अपव्यध्
पुरा | च | सोमो | अध्वर + ग | ऽवलिह्यते | शुना | यथा | विप्र + जन | प्रमोहिते
महत् + अरण्य | मृगयां | चरित्वा | पुरा | शृगालो | नलिनीं | विगाहते
पुरा | च | सोमो | अध्वर + ग | ऽवलिह्यते | शुना | यथा | विप्र + जन | प्रमोहिते
महत् + अरण्य | मृगयां | चरित्वा | पुरा | शृगालो | नलिनीं | विगाहते