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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.253
(26 verses)
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Sanskrit Text
पुरा
हि
निर्भर्त्सनदण्डमोहिता;
प्रमूढचित्ता
वदनेन
शुष्यता
।
ददाति
कस्मैचिदनर्हते
तनुं;
वराज्यपूर्णामिव
भस्मनि
स्रुचम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पुरा | हि | निर्भर्त्सन + दण्ड + मोहय् | प्रमुह् + चित्त | वदनेन | शुष्यता
ददाति | कस्मैचिद् | अनर्हते | तनुं | वर + आज्य + पूर्ण | इव | भस्मनि | स्रुचम्
ददाति | कस्मैचिद् | अनर्हते | तनुं | वर + आज्य + पूर्ण | इव | भस्मनि | स्रुचम्