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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.214
(37 verses)
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Sanskrit Text
स
तस्य
पर्वतस्याग्रे
निषण्णोऽद्भुतविक्रमः
।
व्यलोकयदमेयात्मा
मुखैर्नानाविधैर्दिशः
।
स
पश्यन्विविधान्भावांश्चकार
निनदं
पुनः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | तस्य | पर्वत + अग्र | निषण्णो | अद्भुत + विक्रम
व्यलोकयद् | अमेय + आत्मन् | मुखैर् | नानाविधैर् | दिशः
स | पश्यन् | विविधान् | भावांश् | चकार | निनदं | पुनः
व्यलोकयद् | अमेय + आत्मन् | मुखैर् | नानाविधैर् | दिशः
स | पश्यन् | विविधान् | भावांश् | चकार | निनदं | पुनः