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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.20
(27 verses)
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Sanskrit Text
तमर्चितं
सर्वदाशार्हपूगै;राशीर्भिरर्कज्वलनप्रकाशम्
।
दृष्ट्वा
शरं
ज्यामभिनीयमानं;
बभूव
हाहाकृतमन्तरिक्षम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तम् | अर्चितं | सर्व + दाश + अर्ह + पूग | आशीर्भिर् | अर्क + ज्वलन + प्रकाश
दृष्ट्वा | शरं | ज्याम् | अभिनीयमानं | बभूव | हाहाकृतम् | अन्तरिक्षम्
दृष्ट्वा | शरं | ज्याम् | अभिनीयमानं | बभूव | हाहाकृतम् | अन्तरिक्षम्