Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.191
(28 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
स
नोऽब्रवीदस्ति
खल्विहैव
सरस्यकूपारो
नाम
कच्छपः
प्रतिवसति
।
स
मत्तश्चिरजाततर
इति
।
स
यदि
कथंचिदभिजानीयादिमं
राजानं
तमकूपारं
पृच्छाम
इति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | नो | ऽब्रवीद् | अस्ति | खलु + इह + एव | सरस्यकूपारो | नाम | कच्छपः | प्रतिवसति
अस्ति | कश्चिद् | भवत् + चिरजाततर | इति
स | यदि | कथंचिद् | अभिजानीयाद् | इमं | राजानं | तम् | अकूपारं | पृच्छाम | इति
अस्ति | कश्चिद् | भवत् + चिरजाततर | इति
स | यदि | कथंचिद् | अभिजानीयाद् | इमं | राजानं | तम् | अकूपारं | पृच्छाम | इति