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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.146
(81 verses)
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Sanskrit Text
लतावल्लीश्च
वेगेन
विकर्षन्पाण्डुनन्दनः
।
उपर्युपरि
शैलाग्रमारुरुक्षुरिव
द्विपः
।
विनर्दमानोऽतिभृशं
सविद्युदिव
तोयदः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
लता + वल्ली | च | वेगेन | विकर्षन् | पाण्डु + नन्दन
उपरि | शैल + अग्र | आरुरुक्षुर् | इव | द्विपः
विनर्दमानो | अति + भृशम् | स + विद्युत् | इव | तोयदः
उपरि | शैल + अग्र | आरुरुक्षुर् | इव | द्विपः
विनर्दमानो | अति + भृशम् | स + विद्युत् | इव | तोयदः