Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.146
(81 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
सोऽचिन्तयद्गते
स्वर्गमर्जुने
मयि
चागते
।
पुष्पहेतोः
कथं
न्वार्यः
करिष्यति
युधिष्ठिरः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सो | ऽचिन्तयद् | गते | स्वर्गम् | अर्जुने | मयि | च + आगम्
पुष्प + हेतु | कथं | नु + आर्य | करिष्यति | युधिष्ठिरः
पुष्प + हेतु | कथं | नु + आर्य | करिष्यति | युधिष्ठिरः