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Currently viewing: Parva 3 - Chapter 3.141 (30 verses)
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Chapter 3.141

अन्तर्हितानि भूतानि रक्षांसि बलवन्ति अग्निना तपसा चैव शक्यं गन्तुं वृकोदर
Yudhishthira said: O Vrikodara, there are in this place, many invisible beings who are all powerful and huge. We shall however be able to pass through them by the merit of our Agnihotra and asceticism.
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अन्तर्हितानि | भूतानि | रक्षांसि | बलवन्ति | च
अग्निना | तपसा | च + एव | शक्यं | गन्तुं | वृकोदर
संनिवर्तय कौन्तेय क्षुत्पिपासे बलान्वयात् ततो बलं दाक्ष्यं संश्रयस्व कुरूद्वह
O son of Kunti, by collecting your prowess, restrain your hunger and thirst, O Vrikodara, have recourse to your strength and cleverness,
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संनिवर्तय | कौन्तेय | क्षुध् + पिपासा | बल + अन्वय
ततो | बलं | च | दाक्ष्यं | च | संश्रयस्व | कुरु + उद्वह
ऋषेस्त्वया श्रुतं वाक्यं कैलासं पर्वतं प्रति बुद्ध्या प्रपश्य कौन्तेय कथं कृष्णा गमिष्यति
O son of Kunti, you have heard what the Rishi (Lomasha) has said about the Kailasa mountain. After due deliberation think, how Krishna (Draupadi) should pass through is place.
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यद् + इदम् | ईरितं | वाक्यं | मद् + एव | तनयं | प्रति
बुद्ध्या | प्रपश्य | कौन्तेय | कथं | कृष्णा | गमिष्यति
अथ वा सहदेवेन धौम्येन सहाभिभो सूदैः पौरोगवैश्चैव सर्वैश्च परिचारकैः
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अथ | वा | सहदेवेन | धौम्येन | च
सूदैः | पौरोगवैश् | च + एव | सर्वैश् | च | परिचारकैः
रथैरश्वैश्च ये चान्ये विप्राः क्लेशासहाः पथि सर्वैस्त्वं सहितो भीम निवर्तस्वायतेक्षण
Or, O exalted Bhima of large eyes, you should better return with Sahadeva, with Dhaumya, with all our charioteers, cooks, scrvants, cars, horses and also the Brahmanas who are worn out with travel.
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रथैर् | अश्वैश् | च | ये | च + अन्य | विप्राः | क्लेश + असह | पथि
सर्वैस् | त्वं | सहितो | भीम | निवृत् + आयम् + ईक्षण
त्रयो वयं गमिष्यामो लघ्वाहारा यतव्रताः अहं नकुलश्चैव लोमशश्च महातपाः
The great ascetic Lomasha, Nakula and I shall proceed living on light food and observing vows.
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त्रयो | वयं | गमिष्यामो | लघु + आहार | यम् + व्रत
अहं | च | नकुलश् | च + एव | लोमशश् | च | महत् + तपस्
ममागमनमाकाङ्क्षन्गङ्गाद्वारे समाहितः वसेह द्रौपदीं रक्षन्यावदागमनं मम
In expectation of my return, wait carefully at the source of the Ganges and protect Draupadi till I come back.
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मद् + आगमन | आकाङ्क्षन् | गङ्गाद्वारे | समाहितः
वस् + इह | द्रौपदीं | रक्षन् | यावत् + आगमन | मम
राजपुत्री श्रमेणार्ता दुःखार्ता चैव भारत व्रजत्येव हि कल्याणी श्वेतवाहदिदृक्षया
Bhima said: O descendant of Bharata, although this blessed princess is afflicted with toil she easily proceeds along in the hope of seeing Shvetavahana (Arjuna).
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राजन् + पुत्री | श्रम + आर्त | दुःख + आर्त | च + एव | भारत
व्रज् + एव | हि | कल्याणी | श्वेत + वाह + दिदृक्षा
तव चाप्यरतिस्तीव्रा वर्धते तमपश्यतः किं पुनः सहदेवं मां कृष्णां भारत
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तव | च + अपि + अरति | तीव्रा | वर्धते | तम् | अपश्यतः
किं | पुनः | सहदेवं | च | मां | च | कृष्णां | च | भारत
रथाः कामं निवर्तन्तां सर्वे परिचारकाः सूदाः पौरोगवाश्चैव मन्यते यत्र नो भवान्
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रथाः | कामं | निवर्तन्तां | सर्वे | च | परिचारकाः
सूदाः | पौरोगवाश् | च + एव | मन्यते | यत्र | नो | भवान्
ह्यहं हातुमिच्छामि भवन्तमिह कर्हिचित् शैलेऽस्मिन्राक्षसाकीर्णे दुर्गेषु विषमेषु
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न | हि + मद् | हातुम् | इच्छामि | भवन्तम् | इह | कर्हिचित्
शैले | ऽस्मिन् | राक्षस + आकृ | दुर्गेषु | विषमेषु | च
इयं चापि महाभागा राजपुत्री यतव्रता त्वामृते पुरुषव्याघ्र नोत्सहेद्विनिवर्तितुम्
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शय्या + पर | महाभागा | पुत्रैः | परिवृता | तदा
स | ते | ऽयं | पुरुष + व्याघ्र | नी + एनद् | गृह + अन्तिक
तथैव सहदेवोऽयं सततं त्वामनुव्रतः जातु विनिवर्तेत मतज्ञो ह्यहमस्य वै
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तथा + एव | सहदेवो | ऽयं | सततं | त्वाम् | अनुव्रतः
न | जातु | विनिवर्तेत | मत + ज्ञ | हि + मद् | अस्य | वै
अपि चात्र महाराज सव्यसाचिदिदृक्षया सर्वे लालसभूताः स्म तस्माद्यास्यामहे सह
O great king, I know his character well; he will never return (without you). We are all cager to see Savyasachi (Arjuna) and therefore we will all go together. If we cannot go on our cars over this mountain of many defiles,
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अपि | च + अत्र | महत् + राज | स्वयं | विश्वावसुर् | जगौ
सर्वे | लालस + भू | स्म | तस्माद् | यास्यामहे | सह
यद्यशक्यो रथैर्गन्तुं शैलोऽयं बहुकन्दरः पद्भिरेव गमिष्यामो मा राजन्विमना भव
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यदि + अशक्य | रथैर् | गन्तुं | शैलो | ऽयं | बहु + कन्दर
पद्भिर् | एव | गमिष्यामो | मा | राजन् | विमना | भव
अहं वहिष्ये पाञ्चालीं यत्र यत्र शक्ष्यति इति मे वर्तते बुद्धिर्मा राजन्विमना भव
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अहं | वहिष्ये | पाञ्चालीं | यत्र | यत्र | न | शक्ष्यति
इति | मे | वर्तते | बुद्धिर् | मा | राजन् | विमना | भव
सुकुमारौ तथा वीरौ माद्रीनन्दिकरावुभौ दुर्गे संतारयिष्यामि यद्यशक्तौ भविष्यतः
I have decided upon this; therefore do not trouble yourself about it. I shall carry these two heroes, the tender sons of Madri, the delight of their mother, over difficult tracts, wherever they will be incapable of walking.
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सुकुमारौ | तथा | वीरौ | माद्री + नन्दिकर + उभ्
दुर्गे | संतारयिष्यामि | यदि + अशक्त | भविष्यतः
एवं ते भाषमाणस्य बलं भीमाभिवर्धताम् यस्त्वमुत्सहसे वोढुं द्रौपदीं विपुलेऽध्वनि
Yudhishthira said: O Bhima, let your strength increase for your speaking thus. You boldly undertake to carry the illustrious Panchala princess.
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एवं | ते | भाषमाणस्य | बलं | भीम + अभिवृध्
यस् | त्वम् | उत्सहसे | वोढुं | द्रौपदीं | विपुले | ऽध्वनि
यमजौ चापि भद्रं ते नैतदन्यत्र विद्यते बलं ते यशश्चैव धर्मः कीर्तिश्च वर्धताम्
And also the twins (Nakula and Sahadeva). Be blessed; such courage does not exist in others. May your strength, fame and virtue increase.
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यम + ज | च + अपि | भद्रं | ते | न + एतद् | अन्यत्र | विद्यते
बलं | च | ते | यशश् | च + एव | धर्मः | कीर्तिश् | च | वर्धताम्
यस्त्वमुत्सहसे नेतुं भ्रातरौ सह कृष्णया मा ते ग्लानिर्महाबाहो मा तेऽस्तु पराभवः
O mighty-armed hero, as you propose to carry our two brothers will Krishna (Draupadi), let not exhaustion or defeat come to you.
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यस् | त्वम् | उत्सहसे | नेतुं | भ्रातरौ | सह | कृष्णया
मा | ते | ग्लानिर् | महत् + बाहु | मा | च | ते | ऽस्तु | पराभवः
ततः कृष्णाब्रवीद्वाक्यं प्रहसन्ती मनोरमा गमिष्यामि संतापः कार्यो मां प्रति भारत
Vaishampayana said : Thereupon the charming Krishna (Draupadi) smilingly said, “O descendant of Bharata, I shall go, you need not be anxious for me."
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ततः | कृष्णा + ब्रू | वाक्यं | प्रहसन्ती | मनोरमा
युधिष्ठिर | न | संतापः | कार्यः | प्रति | वृकोदरम्
तपसा शक्यते गन्तुं पर्वतो गन्धमादनः तपसा चैव कौन्तेय सर्वे योक्ष्यामहे वयम्
Lomasha said: O son of Kunti, one can go to Gandamadana by asceticism; therefore we shall all practise asceticism,
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तपसा | शक्यते | गन्तुं | पर्वतो | गन्धमादनः
उत्सादनीयाः | कौन्तेयाः | सर्वे | क्षत्रस्य | मे | मताः
नकुलः सहदेवश्च भीमसेनश्च पार्थिव अहं त्वं कौन्तेय द्रक्ष्यामः श्वेतवाहनम्
O king, O son of Kunti, Nakula, Sahadeva, Bhimsena, you and myself then shall see Shvetavahana (Arjuna).
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साल्वेयाः | शूरसेन + च | श्रुतसेन + च | पार्थिवाः
अहं | च | त्वं | च | कौन्तेय | द्रक्ष्यामः | श्वेतवाहनम्
एवं संभाषमाणास्ते सुबाहोर्विषयं महत् ददृशुर्मुदिता राजन्प्रभूतगजवाजिमत्
Vaishampayana said : O king, having thus conversed, they saw with delight the extensive kingdom of Suvaka abounding in horses and elephants.
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एवं | सम्भाषमाणास् | ते | सुबाहोर् | विषयं | महत्
बलं | बभूव | राजन् + इन्द्र | प्रभूत + गज + वाजिमत्
किराततङ्गणाकीर्णं कुणिन्दशतसंकुलम् हिमवत्यमरैर्जुष्टं बह्वाश्चर्यसमाकुलम्
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किरात + तङ्गण + आकृ | कुणिन्द + शत + संकुल
हिमवन्त् + अमर | जुष्टं | बहु + आश्चर्य + समाकुल
सुबाहुश्चापि तान्दृष्ट्वा पूजया प्रत्यगृह्णत विषयान्ते कुणिन्दानामीश्वरः प्रीतिपूर्वकम्
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सुबाहु + च + अपि | तान् | दृष्ट्वा | पूजया | प्रत्यगृह्णत
विषय + अन्त | कुणिन्दानाम् | ईश्वरः | प्रीति + पूर्वक
तत्र ते पूजितास्तेन सर्व एव सुखोषिताः प्रतस्थुर्विमले सूर्ये हिमवन्तं गिरिं प्रति
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तत्र | ते | पूजय् + तद् | सर्व | एव | सुख + वस्
प्रतस्थुर् | विमले | सूर्ये | हिमवन्तं | गिरिं | प्रति
इन्द्रसेनमुखांश्चैव भृत्यान्पौरोगवांस्तथा सूदांश्च परिबर्हं द्रौपद्याः सर्वशो नृप
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इन्द्रसेन + मुख | च + एव | भृत्यान् | पौरोगवांस् | तथा
सूदांश् | च | परिबर्हं | च | द्रौपद्याः | सर्वशो | नृप
राज्ञः कुणिन्दाधिपतेः परिदाय महारथाः पद्भिरेव महावीर्या ययुः कौरवनन्दनाः
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राजा | विदर्भ + अधिपति | पिता | मम | महत् + रथ
पूर्व + देश | महत् + वीर्य | विजिग्ये | कुरु + नन्दन
ते शनैः प्राद्रवन्सर्वे कृष्णया सह पाण्डवाः तस्माद्देशात्सुसंहृष्टा द्रष्टुकामा धनंजयम्
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धृतराष्ट्र + अभ्यनुज्ञा | कृष्णया | सह | पाण्डवाः
तस्माद् | देशात् | सु + संहृष् | द्रष्टु + काम | धनंजयम्