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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.120
(30 verses)
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Sanskrit Text
साम्बः
ससूतं
सरथं
भुजाभ्यां;
दुःशासनं
शास्तु
बलात्प्रमथ्य
।
न
विद्यते
जाम्बवतीसुतस्य;
रणेऽविषह्यं
हि
रणोत्कटस्य
॥
Padaccheda (Word Analysis)
साम्बः | स + सूत | स + रथ | भुजाभ्यां | दुःशासनं | शास्तु | बलात् | प्रमथ्य
न | विद्यते | जाम्बवती + सुत | रणे | ऽविषह्यं | हि | रण + उत्कट
न | विद्यते | जाम्बवती + सुत | रणे | ऽविषह्यं | हि | रण + उत्कट