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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.107
(25 verses)
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Sanskrit Text
क्वचित्कनकसंकाशं
क्वचिद्रजतसंनिभम्
।
क्वचिदञ्जनपुञ्जाभं
हिमवन्तमुपागमत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
क्वचित् | कनक + संकाश | क्वचिद् | रजत + संनिभ
क्वचिद् | अञ्जन + पुञ्ज + आभ | हिमवन्तम् | उपागमत्
क्वचिद् | अञ्जन + पुञ्ज + आभ | हिमवन्तम् | उपागमत्