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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.10
(23 verses)
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Sanskrit Text
एकस्तत्र
बलोपेतो
धुरमुद्वहतेऽधिकाम्
।
अपरोऽल्पबलप्राणः
कृशो
धमनिसंततः
।
कृच्छ्रादुद्वहते
भारं
तं
वै
शोचामि
वासव
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एकस् | तत्र | बल + उपे | धुरम् | उद्वहते | ऽधिकाम्
अपरो | अल्प + बल + प्राण | कृशो | धमनिसंततः
कृच्छ्राद् | उद्वहते | भारं | तं | वै | शोचामि | वासव
अपरो | अल्प + बल + प्राण | कृशो | धमनिसंततः
कृच्छ्राद् | उद्वहते | भारं | तं | वै | शोचामि | वासव