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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.8
(38 verses)
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Sanskrit Text
असंबाधा
हि
सा
पार्थ
रम्या
कामगमा
सभा
।
दीर्घकालं
तपस्तप्त्वा
निर्मिता
विश्वकर्मणा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
असंबाधा | हि | सा | पार्थ | रम्या | काम + गम | सभा
पुरीं | सर्व + गुण + उपे | निर्मितां | विश्वकर्मणा
पुरीं | सर्व + गुण + उपे | निर्मितां | विश्वकर्मणा