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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.67
(21 verses)
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Sanskrit Text
उपस्तीर्णा
सभा
राजन्नक्षानुप्त्वा
युधिष्ठिर
।
एहि
पाण्डव
दीव्येति
पिता
त्वामाह
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
उपस्तीर्णा | सभा | राजन्न् | अक्षान् | उप्त्वा | युधिष्ठिर
एहि | पाण्डव | दीव् + इति | पिता | त्वाम् | आह | भारत
एहि | पाण्डव | दीव् + इति | पिता | त्वाम् | आह | भारत