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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.61
(82 verses)
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Sanskrit Text
शशाप
तत्र
भीमस्तु
राजमध्ये
महास्वनः
।
क्रोधाद्विस्फुरमाणोष्ठो
विनिष्पिष्य
करे
करम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शशाप | तत्र | भीम + तु | राजन् + मध्य | महत् + स्वन
क्रोधाद् | विस्फुर् + उष्ठ | विनिष्पिष्य | करे | करम्
क्रोधाद् | विस्फुर् + उष्ठ | विनिष्पिष्य | करे | करम्