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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.60
(47 verses)
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Sanskrit Text
सभां
गत्वा
स
चोवाच
द्रौपद्यास्तद्वचस्तदा
।
कस्येशो
नः
पराजैषीरिति
त्वामाह
द्रौपदी
।
किं
नु
पूर्वं
पराजैषीरात्मानमथ
वापि
माम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सभां | गत्वा | स | च + वच् | द्रौपदी + तद् | वचस् + तदा
क + ईश | नः | पराजैषीर् | इति | त्वाम् | आह | द्रौपदी
किं | नु | पूर्वं | पराजैषीर् | आत्मानं | मां | नु | भारत
क + ईश | नः | पराजैषीर् | इति | त्वाम् | आह | द्रौपदी
किं | नु | पूर्वं | पराजैषीर् | आत्मानं | मां | नु | भारत