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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.60
(47 verses)
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Sanskrit Text
सा
कृष्यमाणा
नमिताङ्गयष्टिः;
शनैरुवाचाद्य
रजस्वलास्मि
।
एकं
च
वासो
मम
मन्दबुद्धे;
सभां
नेतुं
नार्हसि
मामनार्य
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सा | कृष्यमाणा | नमय् + अङ्ग + यष्टि | शनैर् | वच् + अद्य | रजस्वला + अस्
एकं | च | वासो | मम | मन्द + बुद्धि | सभां | नेतुं | न + अर्ह् | माम् | अनार्य
एकं | च | वासो | मम | मन्द + बुद्धि | सभां | नेतुं | न + अर्ह् | माम् | अनार्य