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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.49
(25 verses)
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Sanskrit Text
अभिजग्मुर्महात्मानं
मन्त्रवद्भूरिदक्षिणम्
।
महेन्द्रमिव
देवेन्द्रं
दिवि
सप्तर्षयो
यथा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अभिजग्मुर् | महात्मानं | मन्त्र + वत् | भूरि + दक्षिणा
महत् + इन्द्र | इव | देवेन्द्रं | दिवि | सप्तर्षयो | यथा
महत् + इन्द्र | इव | देवेन्द्रं | दिवि | सप्तर्षयो | यथा