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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.48
(42 verses)
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Sanskrit Text
जवसत्त्वोपपन्नानां
वयःस्थानां
नराधिप
।
बलिं
च
कृत्स्नमादाय
पाण्डवेभ्यो
न्यवेदयत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
जव + सत्त्व + उपपद् | वयःस्थानां | नराधिप
बलिं | च | कृत्स्नम् | आदाय | पाण्डवेभ्यो | न्यवेदयत्
बलिं | च | कृत्स्नम् | आदाय | पाण्डवेभ्यो | न्यवेदयत्