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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.45
(58 verses)
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Sanskrit Text
पार्थिवैर्बहुभिः
कीर्णमुपस्थानं
दिदृक्षुभिः
।
सर्वरत्नान्युपादाय
पार्थिवा
वै
जनेश्वर
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पार्थिवैर् | बहुभिः | कीर्णम् | उपस्थानं | दिदृक्षुभिः
सर्व + रत्न + उपादा | पार्थिवा | वै | जनेश्वर
सर्व + रत्न + उपादा | पार्थिवा | वै | जनेश्वर