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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.44
(22 verses)
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Sanskrit Text
देवने
कुशलश्चाहं
न
मेऽस्ति
सदृशो
भुवि
।
त्रिषु
लोकेषु
कौन्तेयं
तं
त्वं
द्यूते
समाह्वय
॥
Padaccheda (Word Analysis)
रश्मि + प्रग्रहण | पार्थ | न | मे | ऽस्ति | सदृशो | भुवि
त्रिषु | लोकेषु | कौन्तेयं | तं | त्वं | द्यूते | समाह्वय
त्रिषु | लोकेषु | कौन्तेयं | तं | त्वं | द्यूते | समाह्वय