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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.42
(60 verses)
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Sanskrit Text
अश्वमेधे
हयं
मेध्यमुत्सृष्टं
रक्षिभिर्वृतम्
।
पितुर्मे
यज्ञविघ्नार्थमहरत्पापनिश्चयः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अश्वमेधे | हयं | मेध्यम् | उत्सृष्टं | रक्षिभिर् | वृतम्
पितुर् | मे | यज्ञ + विघ्न + अर्थ | अहरत् | पाप + निश्चय
पितुर् | मे | यज्ञ + विघ्न + अर्थ | अहरत् | पाप + निश्चय