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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.38
(40 verses)
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Sanskrit Text
न
त्वहं
तव
धर्मज्ञ
पश्याम्युपचयं
क्वचित्
।
न
हि
ते
सेविता
वृद्धा
य
एवं
धर्ममब्रुवन्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | तु + मद् | तव | धर्म + ज्ञ | दृश् + उपचय | क्वचित्
न | हि | ते | सेविता | वृद्धा | य | एवं | धर्मम् | अब्रुवन्
न | हि | ते | सेविता | वृद्धा | य | एवं | धर्मम् | अब्रुवन्