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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.24
(27 verses)
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Sanskrit Text
विजित्य
पर्वतान्सर्वान्ये
च
तत्र
नराधिपाः
।
तान्वशे
स्थापयित्वा
स
रत्नान्यादाय
सर्वशः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
विजित्य | पर्वतान् | सर्वान् | ये | च | तत्र | नराधिपाः
तान् | वशे | स्थापयित्वा | स | रत्न + आदा | सर्वशः
तान् | वशे | स्थापयित्वा | स | रत्न + आदा | सर्वशः