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Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.18
(30 verses)
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Sanskrit Text
एवमेव
यदुश्रेष्ठं
पार्थः
कार्यार्थसिद्धये
।
अर्जुनः
कृष्णमन्वेतु
भीमोऽन्वेतु
धनंजयम्
।
नयो
जयो
बलं
चैव
विक्रमे
सिद्धिमेष्यति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एवम् | एव | यदुश्रेष्ठं | पार्थः | कार्य + अर्थ + सिद्धि
अर्जुनः | कृष्णम् | अन्वेतु | भीमो | ऽन्वेतु | धनंजयम्
नयो | जयो | बलं | च + एव | विक्रमे | सिद्धिम् | एष्यति
अर्जुनः | कृष्णम् | अन्वेतु | भीमो | ऽन्वेतु | धनंजयम्
नयो | जयो | बलं | च + एव | विक्रमे | सिद्धिम् | एष्यति