Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 2 -
Chapter 2.14
(20 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
प्राप्नुयात्स
यशो
दीप्तं
तत्र
यो
विघ्नमाचरेत्
।
जयेद्यश्च
जरासंधं
स
सम्राण्नियतं
भवेत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
प्राप्नुयात् | स | यशो | दीप्तं | तत्र | यो | विघ्नम् | आचरेत्
जयेद् | यद् + च | जरासंधं | स | सम्राण् | नियतं | भवेत्
जयेद् | यद् + च | जरासंधं | स | सम्राण् | नियतं | भवेत्